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जे एन यू में चाट परम्परा नवम्बर 15, 2008

Filed under: जे एन यू में चाट परम्परा — Satish Chandra Satyarthi @ 11:24 पूर्वाह्न
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सबसे पहले चाटशब्द पर थोड़ा प्रकाश डालना या यूं कहें कि इसका स्पष्टीकरण देना ज़रूरी है। वर्ना कुछ लोग इसे अंग्रेजी वाले चैटका हिन्दी रुपन्तरण अथवा चाटपकौड़े वाली चाट समझने की भूल भी कर सकते हैं। अब हर किसी को अपने जितना अकलमंद तो नहीं समझ सकते ! हां तो, यहां चाट शब्द चाटनाक्रिया से बना है; लेकिन वो लिकवाला चाटना नहीं। इसका सीधा मतलब है किसी को जबर्दस्ती भाषण (बकवास) पिला पिला कर बोर करना। यह चाट प्रजाति हर जगह पाई जाती है; चाहे गलीमुहल्ला हो, ऑफ़िस हो या फ़िर स्कूल कॉलेज। इन्हें यह भ्रम होता है कि ये अरस्तू और सुकरात से भी बड़े विचारक और विवेकानन्द से भी बड़े वक्ता हैं। ये दुनिया के अज्ञानियों को ज्ञान बांटना अपना कर्तव्य या यों कहें कि अधिकार समझते हैं। इन्हें लगता है कि इनके वचनामृत सुनकर लोग लोग धन्य हो जाएंगे।

हमारे जे एन यू में चाटों की एक दीर्घकालीन परंपरा रही है। यहां पाये जाने वाले चाटों की मुख्य किस्में इस प्रकार हैं:-

हल्का चाट :- ये आमतौर पर नये या फ़िर चाट विद्या में मंदबुद्धि चाट होते हैं। ये चाटते कम हैं और बदनाम ज्यादा होते हैं। ये अगर रास्ते में मिल जायें तो आठदस फ़ालतू के सवाल चेंप देंगे। सवालों की प्रकृति बड़ी निर्दोष किस्म की होगी; जैसे हॉस्टल से रहे हैं क्या?” (और क्या किताबें लेके काशी से आऊंगा), “अभी रहा था तो रास्ते में आपके क्लास का एक लड़का दिखा था” (तो मैं क्या करूं) इत्यादि। आपको चिढ़ बहुत आयेगी मगर जवाब तो देना ही पड़ेगा। इन्हें इससे कोई मतलब नहीं कि आप क्लास के लिए लेट हो रहे हैं या आपका एक्जाम छूट रहा है। हां, एक बात और, ये दिन में जितनी बार आपसे मिलेंगे उतनी बार हाथ मिलाएंगे और कैसे हैंइस मुद्रा में पुछेंगे जैसे वर्षों के बिछुड़े भाई मिलें हों।

कड़ा चाट :- ऐसे चाटों का मानना होता है कि अवसर का इंतजार मत करो बल्कि उसे तलाशो। इनके अनुसार तसल्ली से बातचीत तो कमरे पर ही हो सकती है, इसलिए ये सीधे आपके कमरे पर ही पधारते हैं। पधारने का समय ऐसा अनुकूल होता है कि आप कोई बहाना बनाकर छूट भी नहीं सकते; जैसे, जब आप लंच के बाद सोने के लिए बिस्तर पर बस लेटने ही वाले हों या फ़िर छुट्टी का दिन हो और आप कमरे में पायजामा और बनियान में आराम से अखबार वगैरह पढ़ रहे हों। ये आते ही पहला वाक्य बोलेंगे अरे, आपको फ़ालतू डिस्टर्ब किया। दर असल कमरे में बैठकर बोर हो रहा था। अब हॉस्टल में दोचार बातें करने लायक आदमी ही कितने हैं (आप जैसे बेवकूफ़ को छोड़कर)और आप फ़ॉर्मलिटी निभाते हुए कहेंगे अरे नहीं, अच्छे आये; मैं भी बोर ही हो रहा था इसके बाद उनका चाट भाषण शुरू होगा। बिषय उनके ही महान जीवन से जुड़े होंगे; जैसे, कैसे उनके फलाना शिक्षक के एक्जाम में सारे प्रश्न सही करने के बाद भी (*गाली*) शिक्षक ने फ़ेल कर दिया या फ़िर कैसे गांव मे उन्होंने दारोगा पर गोली चला दी इत्यादि। आप ये सोच कर अनमने ढंग से सिर्फ़ हाँ“, “हूँकरते रहेंगे कि मेरा ज्यादा इंटरेस्ट नहीं देखकर ये जल्दी चला जायेगा। लेकिन वो चाट ही क्या जो इतनी जल्दी हार मान ले। आखिरकार आप ऊब कर कहेंगे,”चलिये, गंगा ढाबे पर चाय पीकर आते हैं ये सोचकर कि शायद ये महाशय चाय पीकर उधर से ही अपने कमरे में चले जायेंगे। इसी सुखद कल्पना में चाय और पकौड़े के पैसे भी आप ही दे देंगे। लेकिन आप यह देखकर सर पीट लेंगे कि श्रीमान आपके साथसाथ ही वापस आपके कमरे का रुख करते हैं।

राजनीतिक चाट :- ये किसी छात्र संगठन से जुड़े होते हैं इनको आप हुलिये से भी पह्चान सकते हैं: बढी हुई दाढ़ी, कंधे पर झोला और पैरों में हवाई चप्पल। ऐसा लगेगा सारी दुनिया को बदलने का जिम्मेदारी इन्ही के कंधों पर है। ये अपको कैंपस में यहांवहां भटकते हुए, ढाबों पर (शिकार की तलाश में) अथवा किसी धरना, प्रदर्शन या भूख हड़ताल में दिख जाएंगे। इनका भाषण रेडिमेड होता है और मौका देखते ही न्यूक्लियर डील, आतंकवाद, या बम विस्फ़ोटों के ऊपर आधे पौन घंटे का भाषण पेल देंगे। ये छोटी से छोटी बात को भी इतने जोरदार और उत्तेजक तरीके से बोलेंगे कि अपको लगेगा कि शायद तीसरा विश्वयुद्ध छिड़ गया है। उदाहरण के लिए किसी लड़के ने चलती बस से थूक दिया और वो गलती से किसी पर पड़ गया इसपर उनका भाषण होगा,”यह कोई छोटी घटना नहीं है, आप इसकी गहराई में जाएं तो यह समाजवादी आंदोलन को धूमिल करने और कुचलने की कोशिश है। यहां बस पर बैठा छात्र पूंजीवाद का प्रतीक है और फ़ूटपाथी विद्यार्थी समाजवाद और प्रगतिशील विचरधारा का। हमारी जे एन यू प्रशासन से माँग है कि () इस मामले की जांच के लिए एक उच्च्स्तरीय कमिटी बनाई जाए, () पीड़ित छात्र को अगली दो परीक्षाओं में बिना बैठे ही पास कर दिया जाये और () कैम्पस मे थूक फेंकने वालों (खासकर बस से) पर पोटा और मकोका के तहत मुकदमा चलाया जाए। हमारी पार्टी यह भी चाहेगी की पूरे देश में इस मुद्दे एक सार्थक बहस हो। आज शाम इसी मुद्दे पर हम माही हॉस्टल मेस मे एक मीटिंग कर रहे हैं जिसमें हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष फलानाप्रसाद डिमकानादास भी रहे हैं। आपको ज़रूर आना है (यह वाक्य वो इस तरह से बोलेगा कि आपको लगेगा कि आपके बिना उनकी पार्टी और आंदोलन चल ही नहीं पाएंगे)अब इतने ज़बर्दस्त तरीके से चाटे जाने के बाद भी अगर आप उनकी मीटिंग में सोच रहे हैं तो मैं आपकी झेलूप्रतिभा को प्रणाम करता हूं। राजनीतिक चाटों से पिंड छुड़ाना भी उतना ही मुश्किल है। अगर आपने बीच में बोल कि, “अब मैं चलूंगा। मुझे जरा नेहरू प्लेस जाना हैतो वे तपाक से बोलेंगे, “अरे याद आया, नेहरु प्लेस तो मुझे भी जाना था। चलिये साथ में चलते हैं।अब अगर आपको सही में जाना भी होग तो भी आप प्लैन रद्द ही कर देंगे।

खखोर चाट :- ये बड़े ही घातक किस्म के चाट होते हैं। इन्हें दूर से ही देखकर लोग अपना रास्ता बदल लेते हैं। चाट समाज इन्हें अपना गौरव मानता है। एक्चुअली, ये चाटते कम हैं, खखोरते ज्यादा हैं। इन्हें बुद्धिजीवी चाटभी कहते हैं। इनकी पह्चान यह है कि ये गुमसुम और विचारमग्न मुद्रा में रहेंगे, इनके हाथ में अकसर किसी बड़े अंग्रेजी लेखक की मोटी सी किताब रहेगी (जिसका शीर्षक भी हमआप जैसे मूढ़मति की समझ से बाहर होगा, किताब तो दूर की बात है) ये जेनरली आइ एस या पी सी एस की तैयारी कर रहे होते हैं इनके चाट भाषण के विषय भी आम आदमी की समझ से बाहर के होते हैं; जैसे, वर्तमान आर्थिक मंदी के संदर्भ में लियोनार्दो दा विन्सी के फ़लाने इसवी में बने चित्र का क्या महत्व है, या फ़िर बोलीविया के एक गांव मे गरीबी हटाने के तरीकों की खोज के लिए अमेरिका की बी सी युनिवर्सिटी में चल रहा १२० करोड़ का रिसर्च प्रोजेक्ट। अब इनको कौन बताए की अगर हमारी वैचारिक क्षमता इतनी ही तीक्ष्ण होती तो यहां बैठकर घास छील रहे होते; किसी हिन्दी चैनल में न्यूज़ एडिटर बन जाते।………………….

परसों सोमवार से एक्ज़ाम है बाकी पोस्ट तीन चार दिन में पूरी करूंगा।

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