चौपाल

आए हो तो थोड़ी देर रुक जाओ भई !!!!

भारत के लिए ओबामा की जीत के मायने नवम्बर 5, 2008

Filed under: सम-सामयिक — Satish Chandra Satyarthi @ 10:13 पूर्वाह्न
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अर्धअश्वेत बराक ओबामा का अमेरिका का 44 वां राष्ट्रपति बनना भले ही उस देश के लिए ऎतिहासिक दिन हो, लेकिन भारत के लिए ओबामा की विजय कुछ चिंता का विषय बन सकती है।

विभिन्न विषयों पर ओबामा के बयानों में यह बात झलकती है कि वे दुनिया में नई ताकत के रूप में उभरते भारत (और चीन) को अमेरिका केसुपर पावरहोने के लिए खतरा मानते हैं।

चाहे भारत द्वारा चंद्रयान छोड़ा जाना हो या अमेरिका में भारतीय कंपनियों द्वाराआउटसोर्सिंगके जरिए काम करना हो, ओबामा ने हर बार भारतआलोचक रुख अपनाया है। इसके अलावा, चुनाव अभियान के दौरान हिलेरी क्लिंटन पर भारतसमर्थक होने और उन्हें चंदा देने वाले अमेरिकीभारतीयों पर ओबामा खेमे के अनर्गल आरोपों तथा आलोचना ने भी काफी हंगामा किया था जिसके लिए ओबामा को माफी भी मांगनी पड़ी थी।


चंद्रयान पर ओबामा की प्रतिक्रिया:

जहां अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक रूप से भारत द्वारा प्रथम मानवरहित अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर भेजे जाने पर बधाई दी थी, वहीं ओबामा की तत्काल प्रतिक्रिया यह थी कि भारत का यह कदम और इससे पहले चीन की अंतरिक्ष में प्रगति, अमेरिका की अंतरिक्ष पर एकछ्त्र नियंत्रण की राह में खतरा थे। ओबामा ने कहा था कि अमेरिका को अपने वैज्ञानिक उन्नति और तेज करनी होगीताकि अन्य देशों को उसकी तकनीकी बराबरी करने से रोका जा सके।

हिलेरी क्लिंटन और भारतीय अमेरिकियों के खिलाफ अभियान:

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण में ओबामा और हिलेरी क्लिंटन के बीच टक्कर थी डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनने के लिए। उस दौरान ओबामा खेमे ने हिलेरी के खिलाफ एक जहर उगलता पर्चा जारी किया था जिसमें बिल और हिलेरी क्लिंटन तथा उनके मित्र, एक धनी भारतीय अमेरिकी व्यवसाई संत सिंह चटवाल की कटु आलोचना की गई थी।

पर्चे में हिलेरी के भारतीय मूल के अमेरिकियों से अच्छे संबंधों पर व्यंग्य करते हुए उन्हेंपंजाब की डॆमोक्रेटिक सिनेटरकहा गया था।

ओबामा खेमे के इस पर्चे में आरोप लगाए गए थे किबिल और हिलेरी क्लिंटन ऎसी कंपनियों से पैसे लेकर भाषण देने के प्रस्ताव स्वीकार करते हैं जो आउटसोर्सिंग कर भारतीयों को अमेरिकियों के हिस्से की नौकरी देती हैं, हिलेरी क्लिंटन ने भारतीय कंपनी में पैसा लगाया है, चटवाल उन्हें चुनाव प्रचार के लिए धन उपलब्ध कराते हैं, चटवाल आर्थिक अपराधी हैं, उन्हें भारत में गिरफ्तार किया गया था और वे जमानत पर रिहा होने के बाद भाग कर वियेना चले गए थे, हिलेरी और बिल क्लिंटन भारतीय समुदाय से अच्छे रिश्तों की वजह से व्यक्तिगत और चुनावी आर्थिक फायदा उठाते हैं, बिल क्लिंटन ने एक भारतीय कंपनी में लाखों डॉलर निवेश किए हैं और हिलेरी क्लिंटन ऎसी कंपनियों से चुनावी चंदा लेती हैं जो अमेरिकियों की नौकरी छीन कर भारतीयों को देती है, हिलेरी क्लिंटन भारतीय व्यवसाइयों के हितों की रक्षक हैं और अमेरिकियों की नौकरी बचाने की उन्हें चिंता नहीं।

इस पर्चे के बंटने पर सिर्फ भारतीय मूल के अमेरिकी बल्कि डेमोक्रेटिक समर्थक भी इस पर्चे की कटु भाषा से नाराज हो गए। इतना तूफान उठा कि ओबामा को अपने खेमे द्वारा जारी इस पर्चे के लिए माफी मांगनी पड़ी।

भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों कोआउटसोर्सिंगका विरोध:
बराक ओबामा आरंभ से ही भारतीय कंपिनियों को अमेरिका से आउटसोर्स कर काम दिए जाने के कट्टर विरोधी रहे हैं। अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने बारबार यह बात दोहरायी किबेंगलुरू और बीजिंगको अमेरिकी कंपनियों द्वारा आउटसोर्स कर काम दिया जाना बंद होना चाहिए ताकि अमेरिकी लोगों को वह काम मिल सके।

हिलेरी क्लिंटन से डॆमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी छीनने के तुरंत बाद उन्होंने घोषणा की थी कि वेभारतीय और चीनी कंपनियों को अमेरिकी नौकरियां आउटसोर्स किया जाना बंद कर देंगे और उन अमेरिकी कंपनियों को टैक्स में छूट देना बंद कर देंगे जो दूसरे देशों को काम आउटसोर्स करती हैं।

कश्मीर को पाकिस्तान कीसमस्याबताना, अमेरिकी मध्यस्थता की बात : ओबामा का ताज़ातरीन बयान जो भारतीय राजनीतिक गलियारों में चिंता का विषय होने के लायक है, कश्मीर से संबंधित है। ओबामा ने अमेरिकी चुनाव के मतदान से एक सप्ताह पहले एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान तभी अफगानिस्तान में आतंकवाद से निबट सकता है जब वह भारतीय सीमा की तरफ से निश्चिंत हो सकेगा और इसके लिएहमें (अमेरिका को) भारतपाकिस्तान के बीच समझ को बढ़ावा देकर कश्मीरसमस्यासुलझाने की कोशिश करनी होगी ताकि वह (पाकिस्तान) भारत पर नहीं बलिक अफगान उग्रवादियों पर ध्यान केंद्रित कर सके।

भारत शुरू से ही कश्मीर में किसी बाहरी देश के दखल के खिलाफ रहा है और ओबामा का यह बयान भारतीय विदेश नीति, कूटनीति और राजनीतिक सिद्धांतों के पूर्णत: खिलाफ है।

अभी तक तो यह चुनाव अभियान की बात थी। एक बार राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ओबामा नई उभरती विश्व ताकतोंभारत और चीनके साथ क्या रुख अपनाते हैं, इस पर भारतीय राजनीति और उद्योग जगत की सतर्क नजर रहेगी।

अर्ध –अश्वेत बराक ओबामा का अमेरिका का 44 वां राष्ट्रपति बनना भले ही उस देश के लिए ऎतिहासिक दिन हो, लेकिन भारत के लिए ओबामा की विजय कुछ चिंता का विषय बन सकती है।

विभिन्न विषयों पर ओबामा के बयानों में यह बात झलकती है कि वे दुनिया में नई ताकत के रूप में उभरते भारत (और चीन) को अमेरिका के “सुपर पावर” होने के लिए खतरा मानते हैं।

चाहे भारत द्वारा चंद्रयान छोड़ा जाना हो या अमेरिका में भारतीय कंपनियों द्वारा “आउटसोर्सिंग” के जरिए काम करना हो, ओबामा ने हर बार भारत-आलोचक रुख अपनाया है। इसके अलावा, चुनाव अभियान के दौरान हिलेरी क्लिंटन पर भारत-समर्थक होने और उन्हें चंदा देने वाले अमेरिकी-भारतीयों पर ओबामा खेमे के अनर्गल आरोपों तथा आलोचना ने भी काफी हंगामा किया था जिसके लिए ओबामा को माफी भी मांगनी पड़ी थी।


चंद्रयान पर ओबामा की प्रतिक्रिया:

जहां अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक रूप से भारत द्वारा प्रथम मानवरहित अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर भेजे जाने पर बधाई दी थी, वहीं ओबामा की तत्काल प्रतिक्रिया यह थी कि भारत का यह कदम और इससे पहले चीन की अंतरिक्ष में प्रगति, अमेरिका की अंतरिक्ष पर एकछ्त्र नियंत्रण की राह में खतरा थे। ओबामा ने कहा था कि अमेरिका को अपने वैज्ञानिक उन्नति और तेज करनी होगी “ताकि अन्य देशों को उसकी तकनीकी बराबरी करने से रोका जा सके।”

हिलेरी क्लिंटन और भारतीय अमेरिकियों के खिलाफ अभियान:

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण में ओबामा और हिलेरी क्लिंटन के बीच टक्कर थी डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनने के लिए। उस दौरान ओबामा खेमे ने हिलेरी के खिलाफ एक जहर उगलता पर्चा जारी किया था जिसमें बिल और हिलेरी क्लिंटन तथा उनके मित्र, एक धनी भारतीय अमेरिकी व्यवसाई संत सिंह चटवाल की कटु आलोचना की गई थी।

पर्चे में हिलेरी के भारतीय मूल के अमेरिकियों से अच्छे संबंधों पर व्यंग्य करते हुए उन्हें “पंजाब की डॆमोक्रेटिक सिनेटर” कहा गया था।

ओबामा खेमे के इस पर्चे में आरोप लगाए गए थे कि “बिल और हिलेरी क्लिंटन ऎसी कंपनियों से पैसे लेकर भाषण देने के प्रस्ताव स्वीकार करते हैं जो आउटसोर्सिंग कर भारतीयों को अमेरिकियों के हिस्से की नौकरी देती हैं, हिलेरी क्लिंटन ने भारतीय कंपनी में पैसा लगाया है, चटवाल उन्हें चुनाव प्रचार के लिए धन उपलब्ध कराते हैं, चटवाल आर्थिक अपराधी हैं, उन्हें भारत में गिरफ्तार किया गया था और वे जमानत पर रिहा होने के बाद भाग कर वियेना चले गए थे, हिलेरी और बिल क्लिंटन भारतीय समुदाय से अच्छे रिश्तों की वजह से व्यक्तिगत और चुनावी आर्थिक फायदा उठाते हैं, बिल क्लिंटन ने एक भारतीय कंपनी में लाखों डॉलर निवेश किए हैं और हिलेरी क्लिंटन ऎसी कंपनियों से चुनावी चंदा लेती हैं जो अमेरिकियों की नौकरी छीन कर भारतीयों को देती है, हिलेरी क्लिंटन भारतीय व्यवसाइयों के हितों की रक्षक हैं और अमेरिकियों की नौकरी बचाने की उन्हें चिंता नहीं।”

इस पर्चे के बंटने पर न सिर्फ भारतीय मूल के अमेरिकी बल्कि डेमोक्रेटिक समर्थक भी इस पर्चे की कटु भाषा से नाराज हो गए। इतना तूफान उठा कि ओबामा को अपने खेमे द्वारा जारी इस पर्चे के लिए माफी मांगनी पड़ी।

भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों को “आउटसोर्सिंग” का विरोध:
बराक ओबामा आरंभ से ही भारतीय कंपिनियों को अमेरिका से आउटसोर्स कर काम दिए जाने के कट्टर विरोधी रहे हैं। अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने बार- बार यह बात दोहरायी कि “बेंगलुरू और बीजिंग” को अमेरिकी कंपनियों द्वारा आउटसोर्स कर काम दिया जाना बंद होना चाहिए ताकि अमेरिकी लोगों को वह काम मिल सके।

हिलेरी क्लिंटन से डॆमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी छीनने के तुरंत बाद उन्होंने घोषणा की थी कि वे “भारतीय और चीनी कंपनियों को अमेरिकी नौकरियां आउटसोर्स किया जाना बंद कर देंगे और उन अमेरिकी कंपनियों को टैक्स में छूट देना बंद कर देंगे जो दूसरे देशों को काम आउटसोर्स करती हैं।”

कश्मीर को पाकिस्तान की “समस्या” बताना, अमेरिकी मध्यस्थता की बात : ओबामा का ताज़ातरीन बयान जो भारतीय राजनीतिक गलियारों में चिंता का विषय होने के लायक है, कश्मीर से संबंधित है। ओबामा ने अमेरिकी चुनाव के मतदान से एक सप्ताह पहले एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान तभी अफगानिस्तान में आतंकवाद से निबट सकता है जब वह भारतीय सीमा की तरफ से निश्चिंत हो सकेगा और इसके लिए “ हमें (अमेरिका को) भारत- पाकिस्तान के बीच समझ को बढ़ावा देकर कश्मीर “समस्या” सुलझाने की कोशिश करनी होगी ताकि वह (पाकिस्तान) भारत पर नहीं बलिक अफगान उग्रवादियों पर ध्यान केंद्रित कर सके।”

भारत शुरू से ही कश्मीर में किसी बाहरी देश के दखल के खिलाफ रहा है और ओबामा का यह बयान भारतीय विदेश नीति, कूटनीति और राजनीतिक सिद्धांतों के पूर्णत: खिलाफ है।

अभी तक तो यह चुनाव अभियान की बात थी। एक बार राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ओबामा नई उभरती विश्व ताकतों- भारत और चीन- के साथ क्या रुख अपनाते हैं, इस पर भारतीय राजनीति और उद्योग जगत की सतर्क नजर रहेगी।

 

अमेरिका के पहले ‘अश्वेत’ राष्ट्रपति बने ओबामा

Filed under: सम-सामयिक — Satish Chandra Satyarthi @ 9:47 पूर्वाह्न
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बराक ओबामा एक ऐसी शख्सियत जिसने अमेरिका के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा। जातीय संघर्ष के इतिहास के गवाह रहे अमेरिका के वह पहले अश्वेत राष्ट्रपति है जो कभी बहुत कम आमदनी में एक सामुदायिक कार्यकर्ता के रूप में काम किया करते थे।

उनकी जीत इस मायने में महत्वपूर्ण है कि 45 साल पहले मानवाधिकार आंदोलन के प्रणेता मार्टिन लूथर किंग ने समानता का जो सपना देखा था वह आज सच हो गया। आमतौर पर भारत समर्थक माने जाने वाले 47 वर्षीय ओबामा अपने नाम और जाति के कारण जानते थे कि व्हाइट हाउस तक पहुंचने का उनका सफर कितना मुश्किल होगा। उन्होंने एक बार कहा भी था कि यह एक युगांतकारी परिवर्तन होगा। केन्याई पिता और श्वेत अमेरिकी माता की संतान ओबामा ने यह कर दिखाया। अमेरिकी जनता को उनमें वह सब नजर आया जिसकी उसे इस कठिन वक्त में दरकार है।

हारवर्ड में पढे़ ओबामा ने 21 माह के कठिन प्रचार अभियान के बाद दुनिया का सबसे ताकतवर ओहदा हासिल किया। पार्टी का उम्मीदवार बनने के लिए उन्होंने पहले अपनी ही पार्टी की हिलेरी क्लिंटन और फिर वियतनाम युद्ध के सेना नायक जान मैक्केन को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका में एक बडे़ बदलाव के संकेत के साथ व्हाइट हाउस की दौड़ में बाजी मार ली। ओबामा जनवरी 2009 में शपथ लेकर अमेरिकी इतिहास के पहले अश्वेत राष्ट्रपति होने का गौरव हासिल करेंगे।

ओबामा की जीत ने अमेरिकी इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। देश सदियों जातीय वैमनस्यता का कोपभाजन बना रहा। आज से 200 साल पहले जिस सामाजिक बुराई का अंत हुआ उसकी सुखद अनुभूति का भी यह जीत प्रतीक है।