चौपाल

आए हो तो थोड़ी देर रुक जाओ भई !!!!

ससुराल गेंदा फूल फ़रवरी 16, 2009

Filed under: सम-सामयिक — Satish Chandra Satyarthi @ 1:29 अपराह्न
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मुझे याद है मैंने जब पहली बार  देहली ६ के गाने “ससुराल गेंदा फूल” को सुना था तो मैं दो मिनट तक हंसता रहा था. हुआ ऐसा था की जेएनयू के जर्मन सेंटर के मेरे एक मित्र  मेरे कमरे में बैठे हुए थे. बातें करते करते अचानक वो ये गाना गुनगुनाने लगे. कुछ तो गाने के शब्द ऐसे थे और कुछ उनका गाने का लहजा कि मुझे हंसी आ गयी. हंसी रुकने पर मैंने पूछा कि कोई नई भोजपुरी एल्बम ख़रीदी है क्या? एक्चुअली वो मित्र बिहार गया जिले से है और भोजपुरी गानों के शौकीन हैं. इसपर उनहोंने आश्चर्य से मुझसे पूछा कि आपने अभी तक ये गाना नहीं सुना है क्या? आजकल तो सभी एफएम चैनलों पर देहली ६ का यही गाना छाया हुआ है.

मैं तुंरत कम्प्युटर पर बैठा और इस गाने को डाउनलोड किया. जब सुना तो सचमुच मन खुश हो गया. गीत की लय लोकगीत जैसी है पर बीट्स क़दमों को थिरकने पर मजबूर कर देते हैं. ऐ आर रहमान साहब का संगीत सचमुच काबिले तारीफ़ है. गीत को रेखा भारद्वाज, श्रद्धा पंडित और सुजाता मजुमदार ने गाया भी बड़ी खूबसूरती से है. लेकिन सबसे अधिक प्रशंसा के पात्र हैं इस गीत के लेखक प्रसून जोशी. शब्दों के प्रयोग को देखकर गुलज़ार की याद हो आती है. प्रसून जोशी सचमुच दूर की रेस के घोडे हैं .

गीत के बोल कुछ इस तरह हैं :-

सास गारी देवे, देवर जी समझा लेवे

ससुराल गेंदा फूल

सैंया छेड़ देवें, ननद चुटकी लेवे

ससुराल गेंदा फूल

छोड़ा बाबुल का अंगना, भावे डेरा पिया का हो

सास गारी देवे, देवर समझा लेवे

ससुराल गेंदा फूल

सैंया है व्यापारी, चले हैं परदेश

सुरतिया निहारूं, जियरा भारी होवे

ससुराल गेंदा फूल

बुशर्ट पहनके, खाइके बीडा पान

पूरे रायपुर से अलग है, सैंया जी की शान

इस गीत में “ससुराल गेंदा फूल” का मतलब मैं नहीं समझ पाया. आपलोगों को कुछ समझ आए तो बताइयेगा.

ये हो सकता है कि नायिका का व्यापारी पति उसे छोड़कर परदेश चला गया है जिससे ससुराल गेंदा फूल की तरह हो गया है जिसमें सुन्दरता तो है लेकिन खुशबू नहीं है. सैंया के बिना ससुराल बिना खुशबू के फूल की तरह है.

और क्या अर्थ हो सकते हैं? आपके विचारों का इंतज़ार रहेगा.

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जे एन यू में २००९-१० सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू जनवरी 30, 2009

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में २००९-१० सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू  हो गयी है | आवेदन पत्र प्राप्त करने की अन्तिम तिथि १६ मार्च है | डाक द्वारा आवेदन पत्र मार्च तक प्राप्त किए जा सकते हैं | आवेदन पत्र जमा करने की अन्तिम तिथि भी १६ मार्च, २००९ हैविभिन्न कोर्सेज के लिए प्रवेश परीक्षा देश भर में १५ मई से १८ मई तक आयोजित की जायेगी।  विशेष जानकारी के लिए जे एन यू की आधिकारिक वेबसाईट देखें

जे एन यू की परीक्षा अथवा प्रवेश प्रवेश प्रकिया के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए आप निसंकोच मुझे लिख सकते हैंमुझे आपकी मदद करने में खुशी होगीविशेष रूप से School of Language, Literature and Culture Studies में BA (Foreign Language), फर्स्ट या सेकंड ईयर के लिए आवेदन करने वाले छात्र किसी भी समस्या के लिए लिखेंउनकी मैं विशेष मदद कर पाऊँगा क्योंकि मैं इसी केन्द्र का छात्र हूँ

 

पंडित भीमसेन जोशी को भारत रत्न नवम्बर 5, 2008

Filed under: सम-सामयिक — Satish Chandra Satyarthi @ 11:41 पूर्वाह्न
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भीमसेन जोशी और पूर्व राष्ट्रपति कलाम

सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी को सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानभारत रत्नसे सम्मानित करने का फ़ैसला किया है.

मंगलवार को राष्ट्रपति भवन की ओर से इस आशय की घोषणा की गई.

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है,” राष्ट्रपति को पंडित भीमसेन जोशी को भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा करते हुए हर्ष हो रहा है.”

86 वर्षीय भीमसेन जोशी किराना घराने के महत्वपूर्ण गायक हैं.

उन्होंने 19 साल की उम्र से गाना शुरू किया था और वो पिछले सात दशकों से शास्त्रीय गायन कर रहे हैं.

इस स्वरसाधक ने अपने तप से भारतीय शास्त्रीय संगीत को अनूठी ऊँचाइयाँ दी हैं.

शास्त्रीय संगीत के पंडितों का कहना है कि गायन का जो अंदाज़ भीमसेन जोशी के पास है वो समकालीन भारतीय संगीत में बहुत कम ही लोगों के मिला है.

वर्ष 1922 में जन्मे पंडित जोशी किराना घराने से संबंध रखते हैं.

उन्हें मुख्य रूप से उनके खयाल शैली और भजन के लिए जाना जाता है.

पंडित जोशी का जन्म कर्नाटक के गडक ज़िले के एक छोटे से शहर में हुआ था. उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे.

पंडित जोशी को वर्ष 1999 में पद्मविभूषण, 1985 में पद्मभूषण और 1972 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.

उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.

 

बीआर चोपड़ा का निधन

Filed under: सम-सामयिक — Satish Chandra Satyarthi @ 10:58 पूर्वाह्न
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भारतीय फ़िल्म जगत के मशहूर निर्माता-निर्देशक बीआर चोपड़ा का लंबी बीमारी के बाद बुधवार सुबह मुंबई में निधन हो गया.

वह 94 साल के थे. उनके परिवार में एक बेटा और दो बेटियाँ हैं.

‘धूल के फूल’, ‘वक्त’, ‘नया दौर’, ‘क़ानून’, ‘हमराज’, ‘इंसाफ़ का तराज़ू’ और ‘निकाह’ जैसी कई सफल फ़िल्में बीआर चोपड़ा की देन हैं.

पर बड़े पर्दे पर ही नहीं, बीआर चोपड़ा ने छोटे पर्दे को भी जो दिया, वो उनके बाद शायद कोई न दे सके.

महाभारत की कथा पर महाभारत नाम से ही एक ऐसा धारावाहिक बीआर चोपड़ा ने बनाया जिसकी प्रसिद्धि का पैमाना आज भी धारावाहिक जगत में मानक के तौर पर देखा जाता है.

मशहूर निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा उनके छोटे भाई है.

महान फ़िल्मकार

फ़िल्म नया दौर
नया दौर जैसी फ़िल्म बीआर चोपड़ा की देन है

बीआर चोपड़ा के नाम से मशहूर बलदेव राज चोपड़ा का जन्म 22 अप्रैल 1914 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था.

उन्होंने लाहौर विश्विवद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में एमए किया था. उन्होंने अपना करियर फ़िल्म पत्रकार के रूप में शुरू किया था.

वर्ष 1955 में बीआर चोपड़ा ने अपने फ़िल्म निर्माण कंपनी बीआर फ़िल्म्स बनाई. इस बैनर की ओर से उन्होंने ‘नया दौर’ बनाई.

बीआर चोपड़ा ने विधवा पुनर्विवाह और वेश्यावृत्ति जैसी सामाजिक समस्या को अपनी फ़िल्मों का विषय बनाया. उनकी ज़्यादातर फ़िल्में किसी न किसी सामाजिक मुद्दे पर आधारित थी.

फ़िल्म जगत में दिए गए उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें फ़िल्मों का सबसे बड़े सम्मन ‘दादा साहब फाल्के’ से सम्मानित किया.

 

भारत के लिए ओबामा की जीत के मायने

Filed under: सम-सामयिक — Satish Chandra Satyarthi @ 10:13 पूर्वाह्न
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अर्धअश्वेत बराक ओबामा का अमेरिका का 44 वां राष्ट्रपति बनना भले ही उस देश के लिए ऎतिहासिक दिन हो, लेकिन भारत के लिए ओबामा की विजय कुछ चिंता का विषय बन सकती है।

विभिन्न विषयों पर ओबामा के बयानों में यह बात झलकती है कि वे दुनिया में नई ताकत के रूप में उभरते भारत (और चीन) को अमेरिका केसुपर पावरहोने के लिए खतरा मानते हैं।

चाहे भारत द्वारा चंद्रयान छोड़ा जाना हो या अमेरिका में भारतीय कंपनियों द्वाराआउटसोर्सिंगके जरिए काम करना हो, ओबामा ने हर बार भारतआलोचक रुख अपनाया है। इसके अलावा, चुनाव अभियान के दौरान हिलेरी क्लिंटन पर भारतसमर्थक होने और उन्हें चंदा देने वाले अमेरिकीभारतीयों पर ओबामा खेमे के अनर्गल आरोपों तथा आलोचना ने भी काफी हंगामा किया था जिसके लिए ओबामा को माफी भी मांगनी पड़ी थी।


चंद्रयान पर ओबामा की प्रतिक्रिया:

जहां अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक रूप से भारत द्वारा प्रथम मानवरहित अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर भेजे जाने पर बधाई दी थी, वहीं ओबामा की तत्काल प्रतिक्रिया यह थी कि भारत का यह कदम और इससे पहले चीन की अंतरिक्ष में प्रगति, अमेरिका की अंतरिक्ष पर एकछ्त्र नियंत्रण की राह में खतरा थे। ओबामा ने कहा था कि अमेरिका को अपने वैज्ञानिक उन्नति और तेज करनी होगीताकि अन्य देशों को उसकी तकनीकी बराबरी करने से रोका जा सके।

हिलेरी क्लिंटन और भारतीय अमेरिकियों के खिलाफ अभियान:

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण में ओबामा और हिलेरी क्लिंटन के बीच टक्कर थी डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनने के लिए। उस दौरान ओबामा खेमे ने हिलेरी के खिलाफ एक जहर उगलता पर्चा जारी किया था जिसमें बिल और हिलेरी क्लिंटन तथा उनके मित्र, एक धनी भारतीय अमेरिकी व्यवसाई संत सिंह चटवाल की कटु आलोचना की गई थी।

पर्चे में हिलेरी के भारतीय मूल के अमेरिकियों से अच्छे संबंधों पर व्यंग्य करते हुए उन्हेंपंजाब की डॆमोक्रेटिक सिनेटरकहा गया था।

ओबामा खेमे के इस पर्चे में आरोप लगाए गए थे किबिल और हिलेरी क्लिंटन ऎसी कंपनियों से पैसे लेकर भाषण देने के प्रस्ताव स्वीकार करते हैं जो आउटसोर्सिंग कर भारतीयों को अमेरिकियों के हिस्से की नौकरी देती हैं, हिलेरी क्लिंटन ने भारतीय कंपनी में पैसा लगाया है, चटवाल उन्हें चुनाव प्रचार के लिए धन उपलब्ध कराते हैं, चटवाल आर्थिक अपराधी हैं, उन्हें भारत में गिरफ्तार किया गया था और वे जमानत पर रिहा होने के बाद भाग कर वियेना चले गए थे, हिलेरी और बिल क्लिंटन भारतीय समुदाय से अच्छे रिश्तों की वजह से व्यक्तिगत और चुनावी आर्थिक फायदा उठाते हैं, बिल क्लिंटन ने एक भारतीय कंपनी में लाखों डॉलर निवेश किए हैं और हिलेरी क्लिंटन ऎसी कंपनियों से चुनावी चंदा लेती हैं जो अमेरिकियों की नौकरी छीन कर भारतीयों को देती है, हिलेरी क्लिंटन भारतीय व्यवसाइयों के हितों की रक्षक हैं और अमेरिकियों की नौकरी बचाने की उन्हें चिंता नहीं।

इस पर्चे के बंटने पर सिर्फ भारतीय मूल के अमेरिकी बल्कि डेमोक्रेटिक समर्थक भी इस पर्चे की कटु भाषा से नाराज हो गए। इतना तूफान उठा कि ओबामा को अपने खेमे द्वारा जारी इस पर्चे के लिए माफी मांगनी पड़ी।

भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों कोआउटसोर्सिंगका विरोध:
बराक ओबामा आरंभ से ही भारतीय कंपिनियों को अमेरिका से आउटसोर्स कर काम दिए जाने के कट्टर विरोधी रहे हैं। अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने बारबार यह बात दोहरायी किबेंगलुरू और बीजिंगको अमेरिकी कंपनियों द्वारा आउटसोर्स कर काम दिया जाना बंद होना चाहिए ताकि अमेरिकी लोगों को वह काम मिल सके।

हिलेरी क्लिंटन से डॆमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी छीनने के तुरंत बाद उन्होंने घोषणा की थी कि वेभारतीय और चीनी कंपनियों को अमेरिकी नौकरियां आउटसोर्स किया जाना बंद कर देंगे और उन अमेरिकी कंपनियों को टैक्स में छूट देना बंद कर देंगे जो दूसरे देशों को काम आउटसोर्स करती हैं।

कश्मीर को पाकिस्तान कीसमस्याबताना, अमेरिकी मध्यस्थता की बात : ओबामा का ताज़ातरीन बयान जो भारतीय राजनीतिक गलियारों में चिंता का विषय होने के लायक है, कश्मीर से संबंधित है। ओबामा ने अमेरिकी चुनाव के मतदान से एक सप्ताह पहले एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान तभी अफगानिस्तान में आतंकवाद से निबट सकता है जब वह भारतीय सीमा की तरफ से निश्चिंत हो सकेगा और इसके लिएहमें (अमेरिका को) भारतपाकिस्तान के बीच समझ को बढ़ावा देकर कश्मीरसमस्यासुलझाने की कोशिश करनी होगी ताकि वह (पाकिस्तान) भारत पर नहीं बलिक अफगान उग्रवादियों पर ध्यान केंद्रित कर सके।

भारत शुरू से ही कश्मीर में किसी बाहरी देश के दखल के खिलाफ रहा है और ओबामा का यह बयान भारतीय विदेश नीति, कूटनीति और राजनीतिक सिद्धांतों के पूर्णत: खिलाफ है।

अभी तक तो यह चुनाव अभियान की बात थी। एक बार राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ओबामा नई उभरती विश्व ताकतोंभारत और चीनके साथ क्या रुख अपनाते हैं, इस पर भारतीय राजनीति और उद्योग जगत की सतर्क नजर रहेगी।

अर्ध –अश्वेत बराक ओबामा का अमेरिका का 44 वां राष्ट्रपति बनना भले ही उस देश के लिए ऎतिहासिक दिन हो, लेकिन भारत के लिए ओबामा की विजय कुछ चिंता का विषय बन सकती है।

विभिन्न विषयों पर ओबामा के बयानों में यह बात झलकती है कि वे दुनिया में नई ताकत के रूप में उभरते भारत (और चीन) को अमेरिका के “सुपर पावर” होने के लिए खतरा मानते हैं।

चाहे भारत द्वारा चंद्रयान छोड़ा जाना हो या अमेरिका में भारतीय कंपनियों द्वारा “आउटसोर्सिंग” के जरिए काम करना हो, ओबामा ने हर बार भारत-आलोचक रुख अपनाया है। इसके अलावा, चुनाव अभियान के दौरान हिलेरी क्लिंटन पर भारत-समर्थक होने और उन्हें चंदा देने वाले अमेरिकी-भारतीयों पर ओबामा खेमे के अनर्गल आरोपों तथा आलोचना ने भी काफी हंगामा किया था जिसके लिए ओबामा को माफी भी मांगनी पड़ी थी।


चंद्रयान पर ओबामा की प्रतिक्रिया:

जहां अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक रूप से भारत द्वारा प्रथम मानवरहित अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर भेजे जाने पर बधाई दी थी, वहीं ओबामा की तत्काल प्रतिक्रिया यह थी कि भारत का यह कदम और इससे पहले चीन की अंतरिक्ष में प्रगति, अमेरिका की अंतरिक्ष पर एकछ्त्र नियंत्रण की राह में खतरा थे। ओबामा ने कहा था कि अमेरिका को अपने वैज्ञानिक उन्नति और तेज करनी होगी “ताकि अन्य देशों को उसकी तकनीकी बराबरी करने से रोका जा सके।”

हिलेरी क्लिंटन और भारतीय अमेरिकियों के खिलाफ अभियान:

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण में ओबामा और हिलेरी क्लिंटन के बीच टक्कर थी डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनने के लिए। उस दौरान ओबामा खेमे ने हिलेरी के खिलाफ एक जहर उगलता पर्चा जारी किया था जिसमें बिल और हिलेरी क्लिंटन तथा उनके मित्र, एक धनी भारतीय अमेरिकी व्यवसाई संत सिंह चटवाल की कटु आलोचना की गई थी।

पर्चे में हिलेरी के भारतीय मूल के अमेरिकियों से अच्छे संबंधों पर व्यंग्य करते हुए उन्हें “पंजाब की डॆमोक्रेटिक सिनेटर” कहा गया था।

ओबामा खेमे के इस पर्चे में आरोप लगाए गए थे कि “बिल और हिलेरी क्लिंटन ऎसी कंपनियों से पैसे लेकर भाषण देने के प्रस्ताव स्वीकार करते हैं जो आउटसोर्सिंग कर भारतीयों को अमेरिकियों के हिस्से की नौकरी देती हैं, हिलेरी क्लिंटन ने भारतीय कंपनी में पैसा लगाया है, चटवाल उन्हें चुनाव प्रचार के लिए धन उपलब्ध कराते हैं, चटवाल आर्थिक अपराधी हैं, उन्हें भारत में गिरफ्तार किया गया था और वे जमानत पर रिहा होने के बाद भाग कर वियेना चले गए थे, हिलेरी और बिल क्लिंटन भारतीय समुदाय से अच्छे रिश्तों की वजह से व्यक्तिगत और चुनावी आर्थिक फायदा उठाते हैं, बिल क्लिंटन ने एक भारतीय कंपनी में लाखों डॉलर निवेश किए हैं और हिलेरी क्लिंटन ऎसी कंपनियों से चुनावी चंदा लेती हैं जो अमेरिकियों की नौकरी छीन कर भारतीयों को देती है, हिलेरी क्लिंटन भारतीय व्यवसाइयों के हितों की रक्षक हैं और अमेरिकियों की नौकरी बचाने की उन्हें चिंता नहीं।”

इस पर्चे के बंटने पर न सिर्फ भारतीय मूल के अमेरिकी बल्कि डेमोक्रेटिक समर्थक भी इस पर्चे की कटु भाषा से नाराज हो गए। इतना तूफान उठा कि ओबामा को अपने खेमे द्वारा जारी इस पर्चे के लिए माफी मांगनी पड़ी।

भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों को “आउटसोर्सिंग” का विरोध:
बराक ओबामा आरंभ से ही भारतीय कंपिनियों को अमेरिका से आउटसोर्स कर काम दिए जाने के कट्टर विरोधी रहे हैं। अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने बार- बार यह बात दोहरायी कि “बेंगलुरू और बीजिंग” को अमेरिकी कंपनियों द्वारा आउटसोर्स कर काम दिया जाना बंद होना चाहिए ताकि अमेरिकी लोगों को वह काम मिल सके।

हिलेरी क्लिंटन से डॆमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी छीनने के तुरंत बाद उन्होंने घोषणा की थी कि वे “भारतीय और चीनी कंपनियों को अमेरिकी नौकरियां आउटसोर्स किया जाना बंद कर देंगे और उन अमेरिकी कंपनियों को टैक्स में छूट देना बंद कर देंगे जो दूसरे देशों को काम आउटसोर्स करती हैं।”

कश्मीर को पाकिस्तान की “समस्या” बताना, अमेरिकी मध्यस्थता की बात : ओबामा का ताज़ातरीन बयान जो भारतीय राजनीतिक गलियारों में चिंता का विषय होने के लायक है, कश्मीर से संबंधित है। ओबामा ने अमेरिकी चुनाव के मतदान से एक सप्ताह पहले एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान तभी अफगानिस्तान में आतंकवाद से निबट सकता है जब वह भारतीय सीमा की तरफ से निश्चिंत हो सकेगा और इसके लिए “ हमें (अमेरिका को) भारत- पाकिस्तान के बीच समझ को बढ़ावा देकर कश्मीर “समस्या” सुलझाने की कोशिश करनी होगी ताकि वह (पाकिस्तान) भारत पर नहीं बलिक अफगान उग्रवादियों पर ध्यान केंद्रित कर सके।”

भारत शुरू से ही कश्मीर में किसी बाहरी देश के दखल के खिलाफ रहा है और ओबामा का यह बयान भारतीय विदेश नीति, कूटनीति और राजनीतिक सिद्धांतों के पूर्णत: खिलाफ है।

अभी तक तो यह चुनाव अभियान की बात थी। एक बार राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ओबामा नई उभरती विश्व ताकतों- भारत और चीन- के साथ क्या रुख अपनाते हैं, इस पर भारतीय राजनीति और उद्योग जगत की सतर्क नजर रहेगी।

 

अमेरिका के पहले ‘अश्वेत’ राष्ट्रपति बने ओबामा

Filed under: सम-सामयिक — Satish Chandra Satyarthi @ 9:47 पूर्वाह्न
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बराक ओबामा एक ऐसी शख्सियत जिसने अमेरिका के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा। जातीय संघर्ष के इतिहास के गवाह रहे अमेरिका के वह पहले अश्वेत राष्ट्रपति है जो कभी बहुत कम आमदनी में एक सामुदायिक कार्यकर्ता के रूप में काम किया करते थे।

उनकी जीत इस मायने में महत्वपूर्ण है कि 45 साल पहले मानवाधिकार आंदोलन के प्रणेता मार्टिन लूथर किंग ने समानता का जो सपना देखा था वह आज सच हो गया। आमतौर पर भारत समर्थक माने जाने वाले 47 वर्षीय ओबामा अपने नाम और जाति के कारण जानते थे कि व्हाइट हाउस तक पहुंचने का उनका सफर कितना मुश्किल होगा। उन्होंने एक बार कहा भी था कि यह एक युगांतकारी परिवर्तन होगा। केन्याई पिता और श्वेत अमेरिकी माता की संतान ओबामा ने यह कर दिखाया। अमेरिकी जनता को उनमें वह सब नजर आया जिसकी उसे इस कठिन वक्त में दरकार है।

हारवर्ड में पढे़ ओबामा ने 21 माह के कठिन प्रचार अभियान के बाद दुनिया का सबसे ताकतवर ओहदा हासिल किया। पार्टी का उम्मीदवार बनने के लिए उन्होंने पहले अपनी ही पार्टी की हिलेरी क्लिंटन और फिर वियतनाम युद्ध के सेना नायक जान मैक्केन को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका में एक बडे़ बदलाव के संकेत के साथ व्हाइट हाउस की दौड़ में बाजी मार ली। ओबामा जनवरी 2009 में शपथ लेकर अमेरिकी इतिहास के पहले अश्वेत राष्ट्रपति होने का गौरव हासिल करेंगे।

ओबामा की जीत ने अमेरिकी इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। देश सदियों जातीय वैमनस्यता का कोपभाजन बना रहा। आज से 200 साल पहले जिस सामाजिक बुराई का अंत हुआ उसकी सुखद अनुभूति का भी यह जीत प्रतीक है।
 

राज ठाकरे और राजनीति का बदलता चरित्र

– एक –

पहले राजनेता नहीं थे। शुरूआती होमोसेपियंस ने दुनिया में जहाँ चाहा, वहाँ अपना तम्बू गाड़ा और वहीं रहने लगे।
फिर धीरे-धीरे शुरुआती राजनेता आए और देश बने। एक देश से दूसरे देश में जाना दूभर हो गया। किसी गढ़रिए ने बॉर्डर क्रॉस किया तो पुलिस पकड़ने लगी।
फिर आए राज ठाकरे टाइप लोग… एक राज्य से दूसरे राज्य में आना-जाना मुश्किल हो गया। गए तो ठोंक-बजा दिए गए।
अब लगता है कुछ दिनों में शहरों की दिक़्क़त आएगी… आगरा से मथुरा गए तो पिटाई हो जाएगी।
फिर राजनीति और आगे बढ़ेगी… प्रांतवाद के बाद मुहल्लावाद भी आएगा। ये सोचकर कॉलेज के मेरे नॉट-सो-गुड-फ़्रेण्ड्स बहुत ख़ुश हैं। अगर मैं छिपीटोले गया, तो मेरा घण्टा बजाने का मौक़ा मिलेगा। मैं भी ख़ुश हूँ… मुझे भी मौक़ा मिलेगा।
इसके बाद गलीवाद भी आएगा… सामने वाली गली में गए ग़लती से तो भरपूर प्रसाद देकर वापस भेजा जाएगा।
फिर शायद राजनीति और विकसित होगी… चूँकि पड़ोसी मनसे का कार्यकर्ता होगा, तो उसके आंगन में गेंद उठाने जाना ख़तरे से खाली नहीं होगा।
आपको भले ये ख़याली पुलाव लगे, लेकिन मुझे राजनीति और राजनेताओं पर पूरा भरोसा है… भविष्य में घर के एक कमरे से दूसरे कमरे में जाना भी ख़ामख़्वाह का ख़तरा मोल लेना होगा।
इसके आगे समझ नहीं आ रहा कि राजनीति कैसे विकसित होगी… आप भी सोचिए ।

– दो –

राज ठाकरे को भूमिपुत्र कहते हैं । भूमिपुत्र तो यूपी-बिहार वाले भी हुए…………….. परिभाषा के हिसाब से, इर्रेस्पेक्टिव ऑफ़ कोई कहीं भी रहे। मेरे ख़्याल से राज्य-पुत्र सरीखा कुछ होना चाहिए।
फिर राजनीति के विकास के साथ –
शहर/क़स्बा/गांव पुत्र
मोहल्ला-पुत्र
गली-पुत्र
मकान-पुत्र
कमरा-पुत्र
आगे आप सोचिए।