चौपाल

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मेरा अध्ययन केन्द्र अक्टूबर 25, 2008

Filed under: मेरा अध्ययन केन्द्र ( सेन्टर ) — Satish Chandra Satyarthi @ 9:19 पूर्वाह्न
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मेरा अध्ययन केन्द्र (सेंटर)

मेरे सेंटर का नामसेंटर फ़ॉर जापानी कोरियन एण्ड नॉर्थ ईस्ट एशियन स्टडीज़ (सी.जे.के.एन...एस.)” है। लेकिन सुविधा के दृष्टिकोण से हम छात्र इसेकोरियन सेंटरकह्ते हैं। यह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय केभाषा, साहित्य और संस्कृति अध्ययन केन्द्र (एस.एल.एल.सी.एस)’ के अन्तर्गत आता है जो कि भारत में भाषा शिक्षण का अग्रणी संस्थान है। कोरियन सेंटर दक्षिण एशिया के उन गिनेचुने संस्थानों में से एक है जहां कोरियन भाषा पढाई जाती है। भारत मे यह एकमात्र संस्थान है जहां कोरियन में बी.. और एम.. पाठयक्रम उपलब्ध हैं। इसके अलावा कुछ अन्य संस्थान जैसे दिल्ली विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय आदि कोरियन मे सर्टिफ़िकेट और डिप्लोमा कोर्सेज़ करवाते हैं।

कोरियन सेंटर मे कुल १० शिक्षक और करीब १०० छात्र हैं। भारतीय शिक्षकों मे श्रीमती वैजयंती राघवन, श्री रविकेश मिश्रा, डॉ. नीरजा समजदार, श्री कौशल कुमार, श्रीमती पुष्पा तिवारी और श्री पी.एन.अजीता हैं तथा कोरियन शिक्षकों में डॉ किम, ली सौन्ग ग्यौन्ग, मिस छो, मिस ना आदि हैं। सभी शिक्षक अपने अपने क्षेत्र के जाने माने विद्वान हैं तथा कोरियन भाषा के शिक्षण में भारत ही नहीं बल्कि विश्व के अग्रणी प्रोफ़ेसर्स कि श्रेणी में आते हैं। हमारे शिक्षक सिर्फ़ भाषा शिक्षण को सरल और रोचक बनाने के लिये हमेशा शोधरत रह्ते हैं बल्कि उन्होंने भारतीय छात्रों की ज़रूरत के अनुकूल कोरियन भाषा कि पुस्तकें भी लिखी हैं जो कि सभी छात्रों को सेंटर के द्वारा मुफ़्त वितरित की जाती हैं।

जे.एन.यू, कोरियन सेंटर के बी..(प्रथम वर्ष)और बी..(द्वितिय वर्ष) पाठयक्रमों के लिये प्रतिवर्ष प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है जिसमें पूरे भारत से हजारों प्रतिभवान छात्र शामिल होते हैं। आज से कुछ वर्ष पहले तक भारतीय छात्रों के बीच कोरियन भाषा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी लेकिन पिछ्ले कुछ वर्षों में प्लेसमेंट के ऊंचे ग्राफ और बहुत सारी स्कॉलरशिप्स की वजह से करियन भाषा के लिये अप्लाई करने वाले छात्रों की संख्या मे भारी वृद्धि है। आज स्थिति यह है कि कोरियन सेंटर अधिक से अधिक मेधावी और उर्जावान छात्रों को आकर्षित कर रहा है। इस सेंटर के छात्र सिर्फ़ अपने सेंटर के कोर्सेज़ मे अव्वल ग्रेड लाते हैं बल्कि अन्य सेन्टर्स और स्कूल्स के ऑप्शनल कोर्सेज़ में भी उच्चतम अंक प्राप्त करते हैं। कई बार यह अन्य सेन्टर्स के छात्रों के लिए ईर्ष्या की वजह भी बन जाता है। लेकिन कोरियन सेंटर के छात्रों की सफ़लता का एक कारण यह है कि वे जे.एन.यू के पढने के सुअवसर तथा अपने समय का पूरा सदुपयोग करते हैं तथा व्यर्थ बात में अपना समय नष्ट करते हुए लक्ष्य पर अपना ध्यान केन्द्रित रखते हैं। यही वजह है कि आज कोरियन सेंटर के कै छात्र एल.जी, सैमसंग, ह्यून्डई, ऑरेकल, विप्रो और इन्फ़ोसिस जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों मे कार्यरत हैं तो कई छात्र विभिन्न स्कॉलरशिप्स पर कोरिया मे अध्ययन कर रहे हैं।

कोरियन सेंटर के विकास और विस्तार में कोरिया की सरकार के साथ साथ वहां की कंपनियां भी योगदान दे रही हैं और उम्मीद है कि आने वाले एकदो वर्षों मे यहां एम.फिल. और पी.एचडी. की पढाई भी शुरू हो जायेगी। कोरियन सेंटर सिर्फ़ कोरियन भाषा के विकास और प्रचारप्रसार में अपन योगदान दे रहा है बल्कि यह दोनों देशों के सामाजिक और संस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ करने मे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत और कोरिया के रजनीतिक, आर्थिक, और संस्कृतिक संबंधों के बीच भाषा एक बडी बाधा है। ऐसे में ऐसे कुशल छात्रो की सख्त ज़रूरत है जो दोनों देशों के बीच की भाषाई दूरी को कम कर सकें। और कोरियन सेंटर इस क्षेत्र मे अपना सकारात्मक योगदान दे रहा है।

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