चौपाल

आए हो तो थोड़ी देर रुक जाओ भई !!!!

बच्चों के साथ क्या “न” करें : कुछ मजेदार कार्टून (भाग २) फ़रवरी 24, 2009

Filed under: हास्य-व्यंग्य — Satish Chandra Satyarthi @ 11:12 पूर्वाह्न
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पिछली पोस्ट की तस्वीरें भी देखें

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बच्चों के साथ क्या “न” करें : कुछ मजेदार कार्टून फ़रवरी 23, 2009

Filed under: हास्य-व्यंग्य — Satish Chandra Satyarthi @ 7:53 अपराह्न
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कुछ और रोचक तस्वीरें आप कल की पोस्ट में देख सकते हैं। The fun contd………………….

आभार: ये सारी तस्वीरें David और Kelly Sopp की किताब
“Safe Baby Handling Tipsसे ली गयी हैं। जब तस्वीरें आपको इतनी पसंद आई हैं तो सोचिए किताब कितनी पसंद आयेगी। आप इस किताब को Amazon पर खरीद सकते हैं।
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गोबर छात्रों के लिए एक्जाम हॉल में करने लायक १७ रोचक काम दिसम्बर 4, 2008

Filed under: रोचक लेख,हास्य-व्यंग्य — Satish Chandra Satyarthi @ 2:10 अपराह्न
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विद्यार्थियों के सामने ऐसी नौबत कई बार आती है कि आपको पहले से पता होता है कि इस एक्जाम में आप पहले से फ़ेल हैं और उसमें अपीयर होने या होने से कई फ़र्क पड़ने वाला नहीं है। ऐसा कई स्थितियों में हो सकता है या तो आपकी अटेंडेंस कम हो, या पिछले एक्जाम्स में फ़ेल हों या तैयारी बिलकुल ही हो। ऐसे में एक्जाम को स्किप मत करें बल्कि उसे मनोरंजन के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करें।

ऐसी स्थिति में एक्जाम हॉल में करने लायक १७ रोचक चीजें :-

. अपने साथ एक तकिया लाएं और एक्जाम हॉल में सो जाएं। एक्जाम खत्म होने के १५ मिनट पहले उठ जाएं और कहें,”अरे! अब शुरु करना चाहिये कॉपी पर कुछ कूड़ा कचड़ा लिख कर एक्जाम खत्म होने से पांच मिनट पहले कॉपी जमा कर के निकल जाएं। इससे क्लास में एक मेधावी छात्र के रूप में आपका वजन बढ़ेगा।

. अगर मैथ या साइंस का एक्जाम है तो निबंध के रूप में उत्तर दें। अगर आर्ट्स/सोशल साइंस का पेपर हो तो संख्याओं, संकेतों और फ़ार्मूलों में उत्तर दें। कुछ क्रियेटिव करें। इंटीग्रेशन और डिफ़रेन्शिएशन के सिंबल्स यूज करें।

. क्वेश्चन पेपर से हवाई जहाज बनाएं और निरीक्षक की नाक के बाएं सुराख पर निशाना लगाएं।

. साथ में चीयर करने के लिए कुछ मित्रों को भी लायें। उन्हें एक्जाम हॉल से बाहर खड़ा करें।

. क्वेश्चन्स को ज़ोर ज़ोर से पढ़ें और खुद से ही तर्क दे देकर बहस भी करें।

. पेपर मिलने के मिनट के बाद उठकर निरीक्षक को बुलाकर जोर जोर से चिल्लाने लगें, “ये पेपर है या नाटक है। कुछ भी समझ में नहीं रहा है जबकि मैंने सारी क्लासें अटेंड की है। और आप हैं कौन? वो रेगुलर वाले टीचर कहां गये जिनके कानों में बाल थे।

. कॉपी में हर सवाल के आगे कोई कारण लिखें कि आप उस सवाल का उत्तर क्यों नहीं दे सकते; जैसे कि यह सवाल मेरी धार्मिक भावनाओं के खिलाफ़ है।

. वीडियो गेम्स लेकर आयें और फ़ुल वोल्युम पर खेलें। पालतू जानवर लायें तो और भी अच्छा है।

. आंसर शीट में कलर पेंसिल्स, क्रेयॉन्स, पेन्ट और खुशबूदार मार्कर्स से लिखें।

. चप्पल, पगड़ी और तौलिया पहन कर आयें।

१०. पूरा पेपर किसी और भाषा (जैसे चाइनीज कोरियन) में लिखें और अगर कोई और भाषा नहीं आती तो एक नई भाषा बना दें। गणित के एक्जाम में हमेशा रोमन नम्बर्स यूज करें।

११. निरीक्षक पर निशाना लगाकर कंकड़ फ़ेंकें और बगल वाले पर इल्ज़ाम लगाएं।

१२. जैसे ही पेपर मिले उसे चबा जाएं और हंसने लगें।

१३. एक्जाम शुरू होने के आधे घंटे बाद ही पेपर जमा करने के लिए खड़े हो जायें। एक्जामिनर के यह कहने पर कि, आधा घंटा और वेट करें, बैठ जाएं। बार बार अंगड़ाई लें और दूसरे परिक्षार्थियों को यह कहकर कोसें कि कैसे कैसे कूढ़मगज पड़े हुए हैं; इतने ईजी पेपर में इतनी देर लगा रहे हैं। ध्यान रखें: अपनी कॉपी खोलकर दिखाने से इनकार कर दें।

१४. अपने साथ एक मुकुट लेकर आयें। बीच बीच में मुकुट पहन कर खड़े हो जायें और कहें,”मैं हूं आज का अर्जुन!”

१५. एक्जाम के दौरान धीरे धीरे मह्बूबा मह्बूबा….” गुनगुनाते रहें। टीचर के कहने पर भी बन्द करें। जब आपको जबर्दस्ती बाहर निकाला जाये तो मस्त बहारों का मैं आशिक……” गाते हुए निकल जायें।

१६. अपने साथ किसी देवीदेवता की छोटी सी मूर्ति लेकर आयें और उसे अपने आगे डेस्क पर रखें। बीच बीच में उसकी पूजाप्रार्थना करें; हो सके तो अगरबत्ती और कुछ पूजन सामग्री भी लायें।

१७.आंसर शीट के साथ किसी अन्य विषय के नोट्स अटैच कर दे (जैसे हिस्ट्री के पेपर में कैल्कुलस के नोट्स) और आंसर शीट में कमेंट लिख दें,”ज़रूरत के अनुसार रिफ़रेंस के लिए अटैच्ड नोट्स देखें





 

राज ठाकरे और राजनीति का बदलता चरित्र नवम्बर 5, 2008

– एक –

पहले राजनेता नहीं थे। शुरूआती होमोसेपियंस ने दुनिया में जहाँ चाहा, वहाँ अपना तम्बू गाड़ा और वहीं रहने लगे।
फिर धीरे-धीरे शुरुआती राजनेता आए और देश बने। एक देश से दूसरे देश में जाना दूभर हो गया। किसी गढ़रिए ने बॉर्डर क्रॉस किया तो पुलिस पकड़ने लगी।
फिर आए राज ठाकरे टाइप लोग… एक राज्य से दूसरे राज्य में आना-जाना मुश्किल हो गया। गए तो ठोंक-बजा दिए गए।
अब लगता है कुछ दिनों में शहरों की दिक़्क़त आएगी… आगरा से मथुरा गए तो पिटाई हो जाएगी।
फिर राजनीति और आगे बढ़ेगी… प्रांतवाद के बाद मुहल्लावाद भी आएगा। ये सोचकर कॉलेज के मेरे नॉट-सो-गुड-फ़्रेण्ड्स बहुत ख़ुश हैं। अगर मैं छिपीटोले गया, तो मेरा घण्टा बजाने का मौक़ा मिलेगा। मैं भी ख़ुश हूँ… मुझे भी मौक़ा मिलेगा।
इसके बाद गलीवाद भी आएगा… सामने वाली गली में गए ग़लती से तो भरपूर प्रसाद देकर वापस भेजा जाएगा।
फिर शायद राजनीति और विकसित होगी… चूँकि पड़ोसी मनसे का कार्यकर्ता होगा, तो उसके आंगन में गेंद उठाने जाना ख़तरे से खाली नहीं होगा।
आपको भले ये ख़याली पुलाव लगे, लेकिन मुझे राजनीति और राजनेताओं पर पूरा भरोसा है… भविष्य में घर के एक कमरे से दूसरे कमरे में जाना भी ख़ामख़्वाह का ख़तरा मोल लेना होगा।
इसके आगे समझ नहीं आ रहा कि राजनीति कैसे विकसित होगी… आप भी सोचिए ।

– दो –

राज ठाकरे को भूमिपुत्र कहते हैं । भूमिपुत्र तो यूपी-बिहार वाले भी हुए…………….. परिभाषा के हिसाब से, इर्रेस्पेक्टिव ऑफ़ कोई कहीं भी रहे। मेरे ख़्याल से राज्य-पुत्र सरीखा कुछ होना चाहिए।
फिर राजनीति के विकास के साथ –
शहर/क़स्बा/गांव पुत्र
मोहल्ला-पुत्र
गली-पुत्र
मकान-पुत्र
कमरा-पुत्र
आगे आप सोचिए।