चौपाल

आए हो तो थोड़ी देर रुक जाओ भई !!!!

मेरे बारे में अक्टूबर 24, 2008

सतीश चन्द्र सत्यार्थी

मेरा नाम सतीश चन्द्र सत्यार्थी है। बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला हूं। मैंने अपनी स्कूली शिक्षा अपने गृह जिले से पूरी की है और अभी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कोरियन भाषा केंद्र में बी.ए. अंतिम वर्ष का छात्र हूं। मेरी रूचियां हैं- साहित्य पढना और नई नई भाषाएं सीखना। हालांकि अभी तक मुझे हिन्दी, अंग्रेजी, कोरियन, जापानी और तुर्की के अलावा और कोइ भाषा नहीं सीख पाया हूं पर मेरा प्रयास है कि जे.एन.यू. मे अपने अध्ययनकाल के दौरान कुछ और भाषाओं जैसे- ग्रीक, हीब्रू और जर्मन आदि की कम से कम बेसिक जानकारी प्राप्त करूं तथा संस्कृत और उर्दू का गहन अध्ययन करूं। देखते हैं हो पाता है या नहीं। खाली समय मे मैं संगीत सुनना पसंद करता हूं; खसकर पुराने हिंदी फिल्मी गीत और गज़लें। गुलाम अली और मेंहदी हसन मेरे पसंदीदा गज़ल गायक हैं। मेरी सबसे बडी कमज़ोरी यह है कि मैं बहुत बडा आलसी हूं। हर काम को कल और परसों पर डालने कि कोशिश करता हूं। और क्या बताऊं अपने बारे में …………………………………………………………..कुछ जानना हो तो लिखियेगा ।
 

16 Responses to “मेरे बारे में”

  1. सतीश जी,
    अपने के घरवा काहाँ हकइ ? हमहूँ नालन्दा जिला के हकिअइ । जरी स नीचे वला साइट पर एक तुरी भेंट देथिन –
    http://magahi-sahitya.blogspot.com
    अपने के सौख भी लगऽ हइ कुछ हम्मर सौख से मिल्लऽ-जुल्लऽ हइ । हमरा कइए गो भासा सिक्खे के बचपने से उत्सुकता रहले ह । लगभग दस भासा में पढ़ ले हिअइ । बोले लगि खाली मगही, हिन्दी, अंग्रेजी । रूसी भासा में Diploma in Literature आउ जर्मन में Diploma in Language. जाहाँ तक लिपि के बात हइ, हमरा भारत के लगभग सब्भे लिपि आबऽ हइ । चार ठो कन्नड लघु-उपन्यास के मगही अनुवाद कइले ह । ओकरा में से एक ठो (“मोती के कंगनवाली”) के मगही त्रैमासिक “मगही समाज” में धारावाहिक के रूप में प्रकाशित हो रहले ह ।

  2. Your site is excellent . Shall like to befriend you .
    Dr Acharya
    0712-2428104 , 09822474440

  3. Satish Chandra satyarthi Says:

    Thanks for your appreciation, Acharya Sir.
    It would be a great pleasure for me to have you as a friend.
    I visited your blog. It as great.

  4. baljeetsingh Says:

    hey man reading hindi literature is a passion to me…and you know I am a bit like you…. a sluggish man, and for more than two years I was reading nothing but thanx to you for creating such an awesome blog…it brought ma interest again in reading… well I too write poetry and I believe for writing something good we need to read something good…but the poems on ur blog are excellent…will be waiting for more to read keep publishing…and one more thing…..do you also writ? if yes,let me then please read your stuff too. well sending you ma email id…you can mail me at witepoetry@yahoo.co.in

  5. Satish Chandra satyarthi Says:

    बलजीत सिंह जी, मेरे ब्लॉग पर आने और अपनी प्रतिक्रया देने के लिए आपका धन्यवाद.
    इस ब्लॉग से लगातार जुड़े रहने के लिए सबसे नीचे के बार में RSS पर क्लिक करें .
    अपना ई-मेल आईडी डालें और सबस्क्राइब करें. मैं जल्द ही अपनी कुछ कवितायेँ भी ब्लॉग पर डालूँगा .

  6. आप की पोस्ट पर टिप्पणी नहीं हो पा रही है. क्या टिप्पणी के लिये यहीं आना पड़ेगा?
    अच्छा ब्लोग है आपका, और निराला जी की “संध्या-सुन्दरी’ पढ़वाने के लिये धन्यवाद.

  7. गौरी शंकर सिंह Says:

    आपका कार्य बहुत ही प्रशंसनिय है । कला के बारे में और कुछ जानना हो तो http://www.thinkquest.org/pls/html/think.page?p=164850495&m=VIEW पर मेरा जालघर देख सकते हैं । आप हमार सब काम त ना देख पईब, पर कुछ त अनुमान लगाइये लेबा अईसन सोचतबानी ।

  8. युवा वर्ग को आगे आना ही होगा भारत देश को विश्व−गुरु बनाने के लिये आप की रुचियो से प्रभावित हुआ|

  9. satish ji,
    aapake blog par aaya achchha laga. kafi mehanat ki hai aapane.
    aapaki safalata ki kamana ke sath
    sasneh
    amitabh

  10. indu Says:

    right side me likha dekha -”induji! kya huaa aapko,
    niche likha tha,-aao,beti aao. ekdm chaunk gai .baba ye kaun sa blog jo dekhta bhi hai .detail nhi padh pai ,par doosre blogs se alg bhi dikh rha hai aur ek hi jgah par kafee matter bhi hain,aap to bde kam ke nikle .itti chhoti umr .shauk itte bde bde
    jite raho

  11. indu puri Says:

    apne blog se jod lo baba .
    yahan sign in ka koi option hi nhi dikh rha,
    tumse to bahut kuchh seekhne ko milega.
    mere blog ”moon-uddhv”par aana kbhi dbe paanv
    tumhari choice ko dekh kar lagta hai ” dil aur dimag rakhte ho baba.
    god bless you

  12. प्रियवर,
    आप के इस प्रयास के महत्व को आंकना मेरे वश की बात नहीं है। हाँ अगर आप मेरे विचार से कि ” देश व विशेषकर नालंदा जिले के ग्रामिण इलाकों को इंटरनेट के माध्यम से विश्व के केन्द्रविन्दु में लाकर उनकी वेहतरी संभव है ” से सहमत हों तो कृपया समुचित प्रत्युत्तर दें/पहल करें।
    सादर
    रमेश कु0 अ0

  13. Varun Madan Says:

    Hi Satish!!

    You have done good job and I appreciate your efforts.
    Keep in touch always!

    Thanks
    Varun

  14. ए प्यारे से बच्चे!
    तुम बहुत गंदे हो. पहले भी बोला था तुम्हारे ब्लॉग को ज्वाइन करना चाहती हूँ. आज भी वापस कह रही हूँ. ज्ञान का खजाना समेटे हुए हो .
    नियमित आना चाहती हूँ पर,,,,,,,,,,,,,,
    याद नही रहता है,भूल जाती हूँ तुम्हारे ब्लॉग का अता पता,तुम्हारा नाम.
    फिर ढूँढने में कितना समय लग जाता है . अब बता दो शराफत से कि कैसे तुम्हारी फोलोअर बनू? मुझे तो ब्लॉग पर ओप्शन दिख ही नही रहा.
    नन्हे राजकुमार ! मेरे हाथ से पिटाई खा जाओगे. सच्ची कह रही हूँ,
    हा हा हा

  15. ravinder Says:

    While searching the poem “mushkil hai apna mail priya” i came to your blog . you have good collection. Please take out some time to visit my very informative blog http://www.SocialServiceFromHome.com . I promise अगर मेरा ब्लॉग अच्छा लगा तो कम से कम आप का 1 महिना तो खर्च हो जायगा इसको पढने में और जीवन का उद्देश्य ही बदल जायगा अगर राजीव दिक्षित को पढ़ या सुन लिया तो


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