चौपाल

आए हो तो थोड़ी देर रुक जाओ भई !!!!

टूटा पहिया – डॉ. धर्मवीर भारती फ़रवरी 8, 2009

Filed under: डॉ. धर्मवीर भारती — Satish Chandra Satyarthi @ 5:30 पूर्वाह्न

मैं
रथ का टूटा हुआ पहिया हूँ
लेकिन मुझे फेंको मत!

क्या जाने कब
इस दुरूह चक्रव्यूह में
अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआ
कोई दुस्साहसी अभिमन्यु आकर घिर जाय!

अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी
बड़े-बड़े महारथी
अकेली निहत्थी आवाज़ को
अपने ब्रह्मास्त्रों से कुचल देना चाहें
तब मैं
रथ का टूटा हुआ पहिया
उसके हाथों में
ब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूँ!
मैं रथ का टूटा पहिया हूँ

लेकिन मुझे फेंको मत
इतिहासों की सामूहिक गति
सहसा झूठी पड़ जाने पर
क्या जाने
सच्चाई टूटे हुए पहियों का आश्रय ले!

१४ जुलाई २००८

 

One Response to “टूटा पहिया – डॉ. धर्मवीर भारती”

  1. Muskan Says:

    yeh kavita mujhe bahut himmat di jab mujhe padhna tha


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