चौपाल

आए हो तो थोड़ी देर रुक जाओ भई !!!!

यौवन का पागलपन – माखनलाल चतुर्वेदी नवम्बर 5, 2008

Filed under: माखनलाल चतुर्वेदी — Satish Chandra Satyarthi @ 1:41 अपराह्न

हम कहते हैं बुरा न मानो,

यौवन मधुर सुनहली छाया।

सपना है, जादू है, छल है ऐसा

पानी पर बनती-मिटती रेखा-सा,

मिट-मिटकर दुनिया देखे रोज़ तमाशा।

यह गुदगुदी, यही बीमारी,

मन हुलसावे, छीजे काया।

हम कहते हैं बुरा न मानो,

यौवन मधुर सुनहली छाया।

वह आया आँखों में, दिल में, छुपकर,

वह आया सपने में, मन में, उठकर,

वह आया साँसों में से स्र्क-स्र्ककर।

हो न पुरानी, नई उठे फिर

कैसी कठिन मोहिनी माया!

हम कहते हैं बुरा न मानो,

यौवन मधुर सुनहली छाया।

 

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