चौपाल

आए हो तो थोड़ी देर रुक जाओ भई !!!!

मेरा गृहजिला – नालंदा अक्टूबर 25, 2008

नालंदा के खंडहर
नालंदा बिहार में पटना से ९० किमी दक्षिण और गया से ६२ किमी की दूरी पर स्थित है। यह विश्व में शिक्षा और संस्कृति के प्राचीनतम केन्द्रनालंदा विश्वविद्यालयके लिए प्रसिद्ध है। अब इस महानतम विश्वविद्यालय के सिर्फ़ खंडहर बचे हैं जो १४ हेक्टेयर क्षेत्र में फ़ैले हैं। संस्कृत में नालंदा का अर्थ होता हैज्ञान देने वाला” (नालम = कमल, जो ज्ञान का प्रतीक है; दा = देना) बुद्ध अपने जीवनकाल में कई बार नालंदा आए और लंबे समय तक ठहरे। जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान महावीर निर्वाण भी नालंदा में ही पावापुरी नामक स्थान पर हुआ।
नालंदा के खंडहर
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना ४७० . में गुप्त साम्राज्य के कुमारगुप्त ने की थी। यह विश्व के प्रथम पूर्णतः आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक था जहां १०,००० शिक्षक और ,००० छात्र रहते थे। यह विश्वविद्यालय स्थापत्य का एक शानदार नमूना था। आज भी इसके अवशेषों के बीच से होकर गुजरने पर आप इसके गौरवशाली अतीत को अनुभव कर सकते हैं। यहां कुल आठ परिसर और दस मन्दिर थे। इसके अलावा कई पूजाघर, झीलें, उद्यान और नौ मंजिल का एक विशाल पुस्तकालय भी था। नालंदा विश्वविद्यालय का पुस्तकालय बौद्ध ग्रन्थों का विश्व में सबसे बड़ा संग्रह था। कहा जाता है कि जब बख्तियार खिलज़ी ने इसमें आग लगवा दी थी तो यह लगातार छः महीने तक जलता रहा था। नालंदा विश्वविद्यालय में विद्यार्थी विज्ञान, खगोलशास्त्र, चिकित्सा, तर्कशास्त्र, गणित, दर्शन, तथा हिन्दु और बौद्ध धर्मों का अध्ययन करते थे। यहां अध्ययन करने के लिए चीन, जापान, कोरिया, तिब्बत, इंडोनेशिया, इरान और तुर्की आदि देशो से विद्यार्थी आते थे। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेन्सांग ने भी यहां अध्ययन किया था तथा अपनी यात्रा वृतान्तों में उसने इसका विस्तृत वर्णन किया है। ११९३ में बख्तियार खिलज़ी ने बिहार पर आक्रमण किया। जब वह नालंदा पहुंचा तो उसने नालंदा विश्वविद्यालय के शिक्षकों से पूछा कि यहां पवित्र ग्रन्थ कुरान है नहीं। जवाब नहीं में मिलने पर उसने नालंदा विश्वविद्यालय को तहस नहस कर दिया और पुस्तकालय में आग लगा दी। इरानी विद्वान मिन्हाज लिखता है कि कई विद्वान शिक्षकों को ज़िन्दा जला दिया गया और कईयों के सर काट लिये गए। इस घटना को कई विद्वानों द्वारा बौद्ध धर्म के पतन के एक कारण के रूप में देखा जाता है। कई विद्वान यह भी कहते हैं कि अनेक महत्वपूर्ण ग्रन्थों के नष्ट हो जाने से भारत आने वाले समय में विज्ञान, खगोलशास्त्र, चिकित्सा और गणित जैसे क्षेत्रों मे पिछड़ गया।
नालंदा के खंडहर

यहां घूमने लायक स्थान हैंनालंदा विश्वविद्यालय खंडहर परिसर मे चैत्यों, विहारों आदि के अवशेष, नव नालंदा महाविहार, नालंदा संग्रहालय , और बड़गांव। बड़गांव नालंदा का निकटतम गांव है जहां एक तालाब के किनारे प्राचीन सूर्य मन्दिर है। यह स्थान छठ के लिए प्रसिद्ध है। नालंदा से थोड़ी दूर पर सिलाव स्थित है जो स्वादिष्टखाज़ाके लिए प्रसिद्ध है) सिलाव से थोड़ा और आगे चलने पर एक और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैराजगृह (रजगीर) इसकी बारे में जानकारी मैं एक अलग पोस्ट में दूंगा।

नालंदा के खंडहर
नालंदा के खंडहर

नालंदा के बारे में और जानकारी के लिए कुछ उपयोगी लिंक

नालंदा विकिपीडिया पर
बीबीसी पर नालंदा की तस्वीरें

नालंदा बिहार पर्यटन विभाग की वेबसाईट पर

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13 Responses to “मेरा गृहजिला – नालंदा”

  1. dhirusingh Says:

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

  2. shobha Says:

    आपका स्वागत है.
    दीपावली की शुभ कामनाएं.

  3. Abhishek Says:

    Achi tasverein uplabdh karayein hain. Badhai aur swagat apni virasat ko samarpit mere blog par bhi.

  4. sukh mansahia Says:

    Ur article is excellent.

  5. vivek singh Says:

    NALANDA IS SOUL OF BIHAR AND ITS CITIZEN IT SHOULD BE

  6. Gajendra Singh Says:

    You have done a good job, by provinding the information in Hindi,keepit up, Nalanda is a matter of pride for WE all INDIANS

  7. We want to use one of your image for academic purpose (non-commercial use) at ILLL University of Delhi (India), therefore we need copyright permission for the same. URL of the Image is given below:

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    Regards, Satish

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  11. rajendra patidar Says:

    Goghatpur gav ki gatha


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