चौपाल

आए हो तो थोड़ी देर रुक जाओ भई !!!!

यौवन का पागलपन – माखनलाल चतुर्वेदी November 5, 2008

Filed under: माखनलाल चतुर्वेदी — Satish Chandra satyarthi @ 1:41 PM

हम कहते हैं बुरा न मानो,

यौवन मधुर सुनहली छाया।

सपना है, जादू है, छल है ऐसा

पानी पर बनती-मिटती रेखा-सा,

मिट-मिटकर दुनिया देखे रोज़ तमाशा।

यह गुदगुदी, यही बीमारी,

मन हुलसावे, छीजे काया।

हम कहते हैं बुरा न मानो,

यौवन मधुर सुनहली छाया।

वह आया आँखों में, दिल में, छुपकर,

वह आया सपने में, मन में, उठकर,

वह आया साँसों में से स्र्क-स्र्ककर।

हो न पुरानी, नई उठे फिर

कैसी कठिन मोहिनी माया!

हम कहते हैं बुरा न मानो,

यौवन मधुर सुनहली छाया।

 

यह अमर निशानी किसकी है? – माखनलाल चतुर्वेदी November 5, 2008

Filed under: माखनलाल चतुर्वेदी — Satish Chandra satyarthi @ 1:41 PM

यह अमर निशानी किसकी है?

बाहर से जी, जी से बाहर-

तक, आनी-जानी किसकी है?

दिल से, आँखों से गालों तक-

यह तरल कहानी किसकी है?

यह अमर निशानी किसकी है?

रोते-रोते भी आँखें मुँद-

जाएँ, सूरत दिख जाती है,

मेरे आँसू में मुसक मिलाने

की नादानी किसकी है?

यह अमर निशानी किसकी है?

सूखी अस्थि, रक्त भी सूखा

सूखे दृग के झरने

तो भी जीवन हरा ! कहो

मधु भरी जवानी किसकी है?

यह अमर निशानी किसकी है?

रैन अँधेरी, बीहड़ पथ है,

यादें थकीं अकेली,

आँखें मूँदें जाती हैं

चरणों की बानी किसकी है?

यह अमर निशानी किसकी है?

आँखें झुकीं पसीना उतरा,

सूझो ओर न ओर न छोर,

तो भी बढ़ूँ खून में यह

दमदार रवानी किसकी है?

यह अमर निशानी किसकी है?

मैंने कितनी धुन से साजे

मीठे सभी इरादे

किन्तु सभी गल गए, कि

आँखें पानी-पानी किसकी है?

यह अमर निशानी किसकी है?

जी पर, सिंहासन पर,

सूली पर, जिसके संकेत चढ़ूँ

आँखों में चुभती-भाती

सूरत मस्तानी किसकी है?

यह अमर निशानी किसकी है?

 

पुष्प की अभिलाषा – माखनलाल चतुर्वेदी November 5, 2008

Filed under: माखनलाल चतुर्वेदी — Satish Chandra satyarthi @ 1:39 PM

चाह नहीं मैं सुरबाला के

गहनों में गूंथा जाऊँ,

चाह नहीं प्रेमी-माला में

बिंध प्यारी को ललचाऊँ,

चाह नहीं, सम्राटों के शव

पर, है हरि, डाला जाऊँ

चाह नहीं, देवों के शिर पर,

चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ!

मुझे तोड़ लेना वनमाली!

उस पथ पर देना तुम फेंक,

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने

जिस पथ जावें वीर अनेक।