
मुझे याद है मैंने जब पहली बार देहली ६ के गाने “ससुराल गेंदा फूल” को सुना था तो मैं दो मिनट तक हंसता रहा था. हुआ ऐसा था की जेएनयू के जर्मन सेंटर के मेरे एक मित्र मेरे कमरे में बैठे हुए थे. बातें करते करते अचानक वो ये गाना गुनगुनाने लगे. कुछ तो गाने के शब्द ऐसे थे और कुछ उनका गाने का लहजा कि मुझे हंसी आ गयी. हंसी रुकने पर मैंने पूछा कि कोई नई भोजपुरी एल्बम ख़रीदी है क्या? एक्चुअली वो मित्र बिहार गया जिले से है और भोजपुरी गानों के शौकीन हैं. इसपर उनहोंने आश्चर्य से मुझसे पूछा कि आपने अभी तक ये गाना नहीं सुना है क्या? आजकल तो सभी एफएम चैनलों पर देहली ६ का यही गाना छाया हुआ है.
मैं तुंरत कम्प्युटर पर बैठा और इस गाने को डाउनलोड किया. जब सुना तो सचमुच मन खुश हो गया. गीत की लय लोकगीत जैसी है पर बीट्स क़दमों को थिरकने पर मजबूर कर देते हैं. ऐ आर रहमान साहब का संगीत सचमुच काबिले तारीफ़ है. गीत को रेखा भारद्वाज, श्रद्धा पंडित और सुजाता मजुमदार ने गाया भी बड़ी खूबसूरती से है. लेकिन सबसे अधिक प्रशंसा के पात्र हैं इस गीत के लेखक प्रसून जोशी. शब्दों के प्रयोग को देखकर गुलज़ार की याद हो आती है. प्रसून जोशी सचमुच दूर की रेस के घोडे हैं .
गीत के बोल कुछ इस तरह हैं :-
सास गारी देवे, देवर जी समझा लेवे
ससुराल गेंदा फूल
सैंया छेड़ देवें, ननद चुटकी लेवे
ससुराल गेंदा फूल
छोड़ा बाबुल का अंगना, भावे डेरा पिया का हो
सास गारी देवे, देवर समझा लेवे
ससुराल गेंदा फूल
सैंया है व्यापारी, चले हैं परदेश
सुरतिया निहारूं, जियरा भारी होवे
ससुराल गेंदा फूल
बुशर्ट पहनके, खाइके बीडा पान
पूरे रायपुर से अलग है, सैंया जी की शान
इस गीत में “ससुराल गेंदा फूल” का मतलब मैं नहीं समझ पाया. आपलोगों को कुछ समझ आए तो बताइयेगा.
ये हो सकता है कि नायिका का व्यापारी पति उसे छोड़कर परदेश चला गया है जिससे ससुराल गेंदा फूल की तरह हो गया है जिसमें सुन्दरता तो है लेकिन खुशबू नहीं है. सैंया के बिना ससुराल बिना खुशबू के फूल की तरह है.
और क्या अर्थ हो सकते हैं? आपके विचारों का इंतज़ार रहेगा.





Sasural (comprising of husband, father-in-law, mother-in-law, brother-in-law and of course Nanad(s) for the ladies is just like Genda Flower. Like uncounted petals of Genda flower and paragan in the middle of it a woman is surrounded by all these new relatives. She is fully secured if all of them procet the lady with their all sorts of capabilities (tan, man & dhan). In that case even if the Husband is not present at home, she feels happy and by remembering her husband, she enjoys her pious relatioship with the other famil members.
This is the culture of India for keeping the family united.
-Anand Ramashish