चौपाल

आए हो तो थोड़ी देर रुक जाओ भई !!!!

हाथ में मेंहदी मांग सिंदुरवा February 1, 2009

Filed under: Uncategorized — Satish Chandra satyarthi @ 4:24 PM
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यह भोजपुरी लोकगीत एक समय में बिहार के हर गाँव में बच्चे से लेकर बूढों तक के बीच में बहुत ही लोकप्रिय हुआ करता था.
आज गाँव गाँव तक सीडी और टीवी की पहुँच के कारण लोग इसे भूल से गए हैं .
पुरानी यादों को एक बार फ़िर से ताज़ा करने की कोशिश कर रहा हूँ .

रचनाकार: अज्ञात

हाथ में मेंहदी मांग सिंदुरवा

बर्बाद कजरवा हो गइले

बाहरे बलम बिना नींद ना आवे

बाहरे बलम बिना नींद ना आवे

उलझन में सवेरवा हो गइले


बिजुरी चमके देवा गर्जे घनघोर बदरवा हो गइले

पापी पपीहा बोलियाँ बोले पापी पपीहा बोलियाँ बोले

दिल धड़के सुवेरवा हो गइले

बाहरे बलम बिन नींद न आवे

उलझन में सुवेरवा हो गइले

आ……………………………..


अरे पहिले पहिले जब अइलीं गवनवा

सासू से झगड़ा हो गइले

बाकें बलम पर…अहा अहा

बांके बलम परदेसवा विराजें

उलझन में सुवेरवा हो गइले


हाथ में मेंहदी मांग सिंदुरवा

बर्बाद कजरवा हो गइले

 

2 Responses to “हाथ में मेंहदी मांग सिंदुरवा”

  1. arsh Says:

    main bhi kabhi ye geet bahot gaya karta tha ,ek bar fir se yaad dilane keliye bahot bahot shukriya……….

    arsh

  2. sameer lal Says:

    अरे वाह!! बहुत आभार इसे यहाँ प्रस्तुत करने का.


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